खूबसूरत यादें
गायत्री के देवर की शादी थी ।घर में खुशियों का माहौल था ।चहल पहल खी-खी , खा खा हर जगह का लगा हुआ था । अमन भी खुश था की गायत्री सारी जिम्मेदारियों को बहुत अच्छे से निभा रही है ।घर की बड़ी बहू जो ठहरी । हल्दी वाले दिन सारी भाभियों ने मिलकर देवर की खिंचाई शुरू की। देवर ने शैतानी के शब्दों में कहा " मेरी छोड़ो मेरा तो जो है सो है, लेकिन आप लोगों की शैतानियां पूछता हूं ।" हां बताएं आप लोगों ने बचपन में क्या-क्या किया और उसका असर कभी आपके जीवन पर हुआ कि नहीं, चलो सब अपने अपने दिल की पोल खोलो गेम की शुरुआत सासू मां से हुई। सासु मां इस खेल में बहुत खुश थी उन्होंने भी अपनी 2-4 किस्से कहानी सुनाएं कि कैसे बचपन में शैतानियां करके सब को परेशान करती थी । अब गायत्री की बारी आई क्योंकि भाभियों में वही बड़ी भाभी थी । उन्होंने कहना शुरू किया मेरे बचपन का एक किस्सा बहुत याद आता मैं दसवीं कक्षा में थी स्कूल जाने के लिए बस से जाना होता था। बस स्टॉप पर बहुत सारे घर थे लेकिन ए...